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सरकार ने 2000 से कम कीमत के स्मार्टफोन बनाने का कंपनीयो को दिया सुझाव

स्मार्टफोन

भारत में स्मार्टफोन यूजर की संख्या आज कल बढ़ती ही जा रही है। इसके चलते हाल ही में भारत में कई स्मार्टफोन लोन्च हुए जिनमें से कुछ स्मार्टफोन की बिक्री तो उम्मीद से भी ज्यादा थी। स्मार्टफोन की ज्यादा बिक्री के कारण भारत में इंटरनेट यूजर की संख्या भी काफी हद तक बढ़ चुकी है। जिससे आज भारत इंटरनेट यूजर की संख्या में दुसरे नंबर का सबसे बडा देश बन गया है।

इंटरनेट का जोर बढ़ते ही हाल ही में भारत सरकार पूरे भारत को कैशलेश बनाने की कोशिश कर रही है। जिससे ज्यादा से ज्यादा यूजर इंटरनेट के जरीए भुगतान कर सकें। इसके चलते हाल ही में भारत के वडाप्रधान नरेंद्र मोदी ने भी एक एप लोन्च किया था जिससे ओनलाईन भुगतान को आसान बनाया जा सकें।

पर जब भारत के कुछ ग्रामीण और एसे विस्तारों की बात सामने आती है जहां इंटरनेट की कमी है। तब कैशलेश भारत के सामने एक प्रश्नार्थ खडा हो जाता है। क्यु की जिस जगह पर इंटरनेट की कमी हो वहां पर ओनलाईन भुगतान को कैसे संभव बनाया जाए।

सरकार ने इस पहलु पर विचार करकें यह नतीजा निकाला है की स्मार्टफोन की कीमत कम कर दि जाए तो एसे इलाको में भी आसानी से ओनलाईन भुगतान को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके लिए सरकार ने हाल ही में लावा, कार्बन, इंटेक्स और माइक्रोमैक्स जैसी कंपनीयो के साथ बातचीत की है और कहां है की 2000 रुपये की कम कीमत के स्मार्टफोन बनाए।

साथ ही इस स्मार्टफोन में ओनलाईन भुगतान का हर एक फिचर मोजुद होना चाहीए, तेज प्रोसेसर के साथ इस फोन में फिंगरप्रिंट सेंसर और 4जी की सुविधा भी होनी चाहीए। हालांकि सरकार के इस तरह की मांग के स्मार्टफोन सिर्फ 2000 में मिलना मुश्केल है।

क्यु की भारत मे मोजुद 3जी स्मार्टफोन की कीमत भी 3000 से उपर है। एसे में तेज प्रोसेसर के साथ 4जी और यूपीआई का सपोर्ट भी देना वो भी सिर्फ 2000 में यह हर एक स्मार्टफोन निर्माता कंपनी के लिए एक चुनोती से कम नही है।

हालांकी भारत सरकार ने अभी तक इसके लिए लेनोवो, शाओमी जैसी चीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनीयो से बात नही की है जो भारत में कम कीमत के स्मार्टफोन लोन्च करने में सक्षम है।

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